वैभव सूर्यवंशी का नया इतिहास, 57 साल पुराना तोड़ा रिकॉर्ड
बेंगलुरु, 31 अगस्त 2026: युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी में एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में महज 42 गेंदों में अर्धशतक जड़कर दलीप ट्रॉफी इतिहास में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।
वैभव ने अपनी पारी में 81 गेंदों पर 92 रन बनाए, जिसमें सात चौके और सात छक्के शामिल रहे। वह 15 साल और 157 दिन की उम्र में इस मुकाम तक पहुंचे। इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था। इस तरह वैभव ने करीब 57 साल पुराना रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
क्वार्टर फाइनल में गेंद से भी दिखाया दम
दिलचस्प बात यह है कि सेमीफाइनल से पहले नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में वैभव बल्ले से ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। वह सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हुए थे। हालांकि, गेंदबाजी में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन ओवर में केवल 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए।
वैभव ने एक ही ओवर में किशन लिंगदोह और इमलीवाटी लेमटूर को आउट किया। उनके इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि वह जरूरत पड़ने पर गेंद से टीम के लिए योगदान दे सकते हैं।
92 रन की तूफानी पारी ने बदला इतिहास
सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने केवल 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और देखते ही देखते 92 रन तक पहुंच गए। उनकी पारी ने ईस्ट जोन को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
वैभव हालांकि शतक से केवल 8 रन दूर रह गए। अगर वह शतक पूरा कर लेते, तो दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी खतरे में आ सकता था। तेंदुलकर ने 1990-91 सत्र में 17 साल और 262 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी शतक लगाया था।
रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं वैभव
महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी लगातार अपने नाम नए रिकॉर्ड जोड़ रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ना उनकी प्रतिभा और तेजी से बढ़ते क्रिकेट करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है।
क्वार्टर फाइनल में गेंद से कमाल और सेमीफाइनल में बल्ले से तूफानी पारी—वैभव ने दलीप ट्रॉफी में यह साबित कर दिया है कि बड़े मंच पर भी वह दबाव के बीच अपनी छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं।